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चिट्टे की शपथ
तैयार कर रहे थे, पुलिसवाला चिट्टा बेच रहा था
शपथ की जरूरत नहीं कड़ी
कार्यवाही की जरूरत है...
विशेष संवाददाता
शिमला : हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल भर्ती में चयनित अभ्यार्थियों को
नियुक्ति पत्र तभी मिलेगा, जब वे न चिट्टा लूंगा न बेचूंगा का शपथ पत्र विभाग
को देंगे। हलांकि कि जिस दिन यह बात की जा रही थी तब भी पुलिस वाले चिट्टा
बेचते हुए पकड़े जा रहे थे। इससे पहले भी एक अधिकारी सहित 11 पुलिस वाले चिट्टे
के आरोप में पकड़े गए थे। अब प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी
दिशा-निर्देशों में चिट्टा न बेचने की शपथ जोड़ दी गई है।
सौ रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर शपथ पत्र लाना अनिवार्य किया गया
है। हिमाचल पुलिस में 1226 आरक्षियों की भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने को है। इन
सभी को यह शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। पुरुष आरक्षियों का प्रशिक्षण पीटीस
डरोह (कांगड़ा) और महिला आरक्षियों का प्रशिक्षण पीटीसी पंडोह (मंडी) में आयोजित
किया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि कुल 9 माह निर्धारित की गई है।
हलांकि पुलिस भर्ती के लिए चिट्टा न लूंगा और न बेचूंगा जैसा शपथ पत्र लेने की
कोई जरूरत नहीं थी। पुलिस नियम वैसे भी इससे ज्यादा कड़े हैं यदि उन सभी नियमों
का कड़ाई से पालन हो तो पुलिस कर्मियों द्वारा की जा रही अपराधिक गतिविधियों में
वैसे भी कमी आ सकती है। लेकिन हो इससे विपरीत रहा है। पुलिस के बड़े रैंक के
अधिकारी अपने समक्ष अधिकारियों पर चिट्टे के कारोबार में संलिप्त होने पर संदेह
जता चुके हैं। लेकिन उस पर कोई जांच नहीं हुई और नतीजा यह निकला कि पुलिस के
कुछ अधिकारी और कर्मचारी चिट्टा बेचने के आरोप गिरफ्तार हुए। हलांकि वह बाद में
बर्खास्त भी किए गए।
पुलिस अधिकारियों को प्रदेश की जनता को यह गारंटी देनी चाहिए कि अब भविष्य में
कोई भी पुलिस से जुड़ा व्यक्ति चिट्टे में पकड़ा नहीं जाएगा और उन्होंने पूरे
पुलिस विभाग की स्कैनिंग कर ली है। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों को यह बात भी
सुनिश्चित करनी चाहिए कि पुलिस की मिली भगत से किसी निर्दोष व्यक्ति के थैले
में चिट्टा रखकर उसे फंसाने का भी प्रयास नहीं किया जाएगा और यदि कोई इस प्रकार
की गतिविधि में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ भी वैसी ही कार्यवाही की जाएगी
जैसे चिट्टा बेचने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ अमल में लाई जाती है।
हिमाचल में चिट्टे का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह
सुक्खू ने भी इसे प्राथमिकता के आधार पर लिया है। मामला गंभीर है और चिट्टे को
हथियार बनाकर भी निर्दोष के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। जाहिर है यदि किसी
निर्दोष को फंसा दिया जाता है तो उसमें भी पुलिस की संलिप्तता होने का संदेह
व्यक्त किया जाता है। अधिकारियों को ऐसे पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कठोर
कार्यवाही का आश्वासन आम जनता को देना चाहिए।
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