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खाड़ी युद्ध में ईरान का लोहा मान लिया पूरी दुनियां ने
ईरान में तख्तापलट नहीं हुआ, ट्रंप संकट में आ गए...

ईरान के खिलाफ इज़राइल- अमेरिका युद्ध में ईरान का
लोहा पूरी दुनियां ने मान लिया। इस युद्ध में सबसे ज्यादा फजिहत अमेरिकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हो रही है जो सोच रहे थे कि पहला हमला करते ही
ईरान में तख्तापलट हो जाएगा। ट्रंप ने इस युद्ध के दौरान बड़े बड़े दावे किए
लेकिन धारातल पह वह सच होते हुए नहीं दिखे। अखिर में ट्रंप को सरेडर की स्थिति
में आते हुए कई तरह के प्रयास करते हुए देखा गया।
अब जो ताजा हालात बने हुए हैं उसमें साफ दिखता है कि अमेरिका इस युद्ध से अपने
हाथ पीछे खींच रहा है और ईरान ने अमेरिका को अपने निशाने पर लिया हुआ है। खाड़ी
देशों में ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया और अमेरिका
को खाड़ी देशों को छोड़कर चले जाने की चेतावनी भी दे डाली है। उधर मुख्य लड़ाई
लड़ने वाला देश इज़राइल इस युद्ध से हटने को तैयार नहीं है और उसने अपने हमले
जारी रखे हुए हैं। ईरान ने इज़राइल को तो मलियामेट कर ही दिया है और अभी इस
युद्ध के लंबा खिंचने के आसार बने हुए हैं।
अभी भी ईरान ने भी इज़राइल पर हमले का जावब हमले से देना जारी रखा हुए है। अब
अमेरिका के पीछे हटने के कोई मायने भी नहीं रह गए हैं क्योंकि वह अगर पीछे हट
भी जाता है तो ईरान इज़राइल युद्ध तो जारी रहेगा। ईरान ने अमेरिका के साथ चल
रही अप्रत्यक्ष वार्ता कथित तौर पर निलंबित कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान
ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ हो रहे संदेशों के आदान प्रदान रोक दिए
हैं।
दोनों देशों के बीच आठ अप्रैल से जारी कमजोर सीजफायर के टूटने और फिर से लड़ाई
जारी रहने का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की ओर से लेबनान में
लगातार हमले किए जा रहे हैं। लेबनान में लड़ाई रुकना युद्धविराम की मुख्य
शर्तों में से था। यह संकट अब बुरी तरह से उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं जो किसी भी हाल में इस युद्ध को अमेरिका के लिए
जीत साबित करने में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान है जो अपने दशकों पुराने
अमेरिकी डर का सामना करके और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।
इस युद्ध से जहां पूरी दुनियां आर्थिक मंदी के दौर में पहुंच गई है वहीं
अमेरिका में तो हालत इमने खराब हो गए हैं कि ट्रंप को अपनी कुर्सी बचानी
मुश्किल हो गई है। अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ कई जगह लोग सड़कों पर निकल कर
प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं लोग अमेरिका को इज़राइल के खिलाफ युद्ध में झौंकने
के खिलाफ खड़े हो गए हैं। इससे वहां की संसद में भी ट्रंप के खिलाफ आवाज बुलंद
होने लगी है। लोग कहने लगे हैं कि नवंबर में ट्रंप को अमेरिका में ही बड़ी हार
मिलने वाली है क्योंकि वह मिड अर्म इलेक्श्न होने वाले हैं। अमेरिका में ही लोग
कहने लगे हैं कि ट्रंप ने अमेरिका कोई कई वर्ष पीछे धकेल दिया है। खाड़ी युद्ध
में ईरान एक शक्तिशाली देश बनकर उभरा है। उसने युद्ध में अपने स्टीक मिजाइलों
से इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों को ध्वस्त किया वहीं दुश्मन देशों के जबरदस्त
प्रहारों को भी सहन किया।
इस युद्ध में ईरान की ओर से जो लाजवाब बात देखी गई वह यह रही कि जब ईरान पर
मिजाइलों और घातक विमानों से हमले हो रहे थे वहां की जनता छुपने की बजाय सड़कों
पर खड़ी थी और मानव श्रृंखला बनाकर मरने के लिए खुले आसमान के वीचे आ गई थी। उस
समय यह भी चरचा तेज हो गई थी कि अमेरिका ईरान पर परवाणू बम से हमला करके अपने
आपको बड़ा बताने का प्रयास करेगा। देश की जनता का जनता ऐसा हौंसला न कभी देखा
गया और न ही कभी सुना गया है। अब चरचा यह होने लगी है कि देश हो तो ईरान जैसा
जहां के लोगों ने अपनी निडरता का परिचय पूरी दुनियां को दिया।
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