Home Page

जंगल में आग लगी, वन विभाग फंड जुटाने में लगा था

हिमाचल का 2386.91 हेक्‍टेयर वन अग्नि की भेंट चढ़ा...

     हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष जब जंगलों में आग लगी लगी हुई थी तो वन विभाग फंड जुटाने में लगा हुआ था। हर वर्ष वनों में लगने वाली आग के लिए भले ही वन विभाग समय रहते कोई सार्थक पहल न करता हो लेकिन केन्द्र सरकार से फंड मांगने में वह उत्सुक रहता है। इस बार भी वन विभाग ने ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना को लेकर सभी वन मंडलाधिकारियों को प्रस्ताव भेजने के आदेश दिए है।
     उपरोक्त दोनों योजनाओं के लिए केंद्र से बजट मुहैया करवाया जाता है। फिर भी हर वर्ष धू धूकर जलने वाले जंगलों की सुरक्षा के बारे में कोई बात नहीं की जाती। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। प्रश्न यह खड़ा होता है कि ऐसे में ग्रीन इंडिया मिशन हिमाचल में कैसे चलाया जा रहा है यह तो वन विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं। अब जब जहां जंगलों में आग लगी हुई थी तो प्रदेश के सभी वन मंडलों में नगर वन योजना और ग्रीन इंडिया मिशन कैसे चलेगा इसके लिए सभी वन मंडल अधिकारियों से प्रस्ताव मांगें गए। जबकि यह कार्य दो तीन माह पहले शुरू हो जाना चाहिए था ताकि मौजूदा आग से वनों को बचाया जा सकता। कहते हैं कागजों पर वन मंडल अधिकारियों को आगामी तीन वर्षों के लिए किए जाने वाले कार्यों को शामिल करना था। जबकि इस बात का जिक्र कहीं नहीं किया गया है कि पिछले तीन वर्षों में कितनी वन संपदा अग्नि की भेट चढ़ गई और वन विभाग ने उसके लिए क्या तैयारियां की थीं। कुछ दिन पहले ही इस संबंधा में प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। दोनों योजनाओं के लिए भारत सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से फंडिंग की जाती है। नगर वन योजना और ग्रीन इंडिया मिशन के तहत प्रदेश के चुनिंदा वन मंडलों में ही कार्य किया जा रहा था।
     ताजा जानकारी के अनुसार फायर सीजन में इस वर्ष 2026 अब तक 133 बार प्रदेश के जंगल जल चुके हैं और 2396.16 हेक्टेयर क्षेत्र आग की भेंट चढ़ चुका है। बड़ी बात यह है कि इन घटनाओं की जद में आकर 126.91 हेक्टेयर में किया गया पौधा रोपण को भी नुक्सान पहुंचा है। प्रदेश में फायर सीजन में सबसे ज्यादा आग की घटनाएं मंडी सर्किल में हुई हैं। यहां 47 मामलों में 259.2 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। शिमला में 1544.36 हेक्टेयर वन क्षेत्र अब तक जल चुका है। इसमें 1512.65 हेक्टेयर प्राकृतिक वन क्षेत्र भी शामिल है। विभाग के धार्मशाला सर्किल में 26 आग की घटनाओं ने 82.7 हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित किया। नाहन सर्किल में 27 घटनाओं में 346.8 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ। हमीरपुर सर्किल में सात घटनाओं में 24.8 हेक्टेयर क्षेत्र जला, जबकि सोलन सर्किल में चार घटनाओं से 34.3 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। बिलासपुर सर्किल में अब तक आग की चार घटनाओं में 12 हेक्टेयर, चंबा और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कुल्लू में आग की दो-दो घटनाओं में क्रमशः 12.5 व 21 हेक्टेयर क्षेत्र आग की भेंट चढ़ा है। सर्किल रामपुर के तहत इस वर्ष फायर सीजन में एक घटना दर्ज हुई है और इससे 4.5 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। अब प्रिंसीपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट कह रहे हैं कि फायर सीजन के मद्देनजर वन विभाग ने सभी संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और फायर लाइन साफ रखने निर्देश दिए है। जबकि इससे पहले वह ग्रीन इंडिया मिशन की फंडिंग में बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे। वन विभाग की इस तरह की लेटलतीफी और लापरवाही के कारण प्रदेश के पर्यावरण और जलवायु को भारी नुक्सान हो रहा है।

Home Page