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शिमला में बर्फ में फिसलने से हड्डियां टूटी
नगर निगम की लापरवाही के कारण घटनाएं बढ़ी...
निजी संवाददाता
शिमला
: शिमला में पिछले दिनों गिरी बर्फ के कारण कई लोगों की फिसल कर
गिरने से हड्डियां टूट गई है और बहुत से घायल हुए हैं। यही बात नगर निगम के
लिए आफत बनकर खड़ी हो गई है। कहते हैं कि पिछले दिनों हुई बर्फबारी के बाद
शहर में मुख्य सड़कों पर रेत के ढेर नहीं रखे गए थे। इस कारण जब सड़कें खोली
गईं तो रेत के ढेर न होने के कारण वह सड़कों पर नहीं बिछ पाई। इस कारण कई
जगह तो बर्फ जमकर काफी सख्त हो गई है और बहुत से लोगों को बर्फ में फिसलने
से चोटें आई हैं।
अचानक हुई बर्फबारी के कारण लक्कड़ बाजार, जाखू, बैनमौर,
कैथू, रुल्दुभट्ट्ठा समेत आसपास के इलाकों में सड़कों पर तो दूर रास्तों पर
पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था। इसके बाद प्रशासन के साथ निगम की व्यवस्था
की पोल खुलकर सामने आई थी। इसके बाद नगर निगम ने बर्फबारी की संभावना को
लेकर कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी थी। कर्मचारियों को निर्देश
दिए गए कि वह अपने स्टेशन पर ही रहें। इससे अगर शहर में कहीं पर भी
बर्फबारी के कारण एंबुलेंस रोड और रास्ते बंद होते हैं तो उन्हें तुरंत
खोला जाए।
इसके अलावा अस्पताल की सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर
खोलने को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। टाउन हॉल महापौर सुरेंद्र
चौहान ने नगर निगम के एसडीओ और जेई के साथ आपात बैठक की। बैठक में महापौर
ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कर्मचारी स्टेशन पर रहें। वहीं अगर
बर्फबारी होती है तो केएनएन, डीडीयू और आईजीएमसी अस्पताल के अलावा लक्कड़
बाजार सड़क को आवाजाही के लिए तुरंत बहाल किया जाए। इससे आपात स्थिति में
उपचार के लिए आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी पेश न हो। महापौर ने
बैठक के दौरान छोटे रोबोट की तकनीकी जांच पूरा करने को कहा। इससे सड़कों को
खोलने के काम के दौरान किसी तरह की समस्या पेश न आए। नगर निगम के अनुसार
पांच छोटे रोबोट और दो जेसीबी को तैयार रखा गया है। इसके अलावा 150 मजदूरों
के अलावा निगम के 50 कर्मचारियों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
उधर लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम से पहले से पुख्ता
इंतजाम किए होते तो लोगों को पहली बर्फबारी में भी अनावश्यक परेशानियों का
सामना न करना पड़ता। यह बात भी सभी जानते हैं कि जनवरी फरवरी माह में तो
बर्फ गिरती ही है। इसलिए सभी जरूरी इंतजाम पहले से ही पूरे कर लिए जाते
हैं। लेकिन इस बार की लापरवाही महंगी पड़ गई।
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कुछ ही समय में हिमाचल में इलेक्ट्रिकल टैक्सियां नजर आएंगी
केवल हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत वाहन ही इसमें पात्र होंगे...
निजी
संवाददाता
शिमला : कुछ ही
समय में हिमाचल प्रदेश में लोगों को इलेक्ट्रिक टैक्सियां नजर आएंगी। प्रदेश
सरकार ने इसके लिए योजना को सार्वजनिक कर दिया है कि किस प्रकार से प्रदेश में
दौड़ रही टैक्सियों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार
ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना में डीजल और पेट्रोल टैक्सियों को
इलेक्ट्रिक टैक्सी में बदलने के लिए एसओपी भी जारी कर दी है।
परिवहन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार इस योजना
के तहत अधिकतम 1000 टैक्सियों को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। राज्य में
हरित परिवहन को बढ़ावा देने और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से यह
फैसला लिया है। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। अधिसूचना में
बताया गया है कि योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को स्वीकृत ई-टैक्सी की
लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 20 लाख रुपए
निर्धारित की गई है। यह सब्सिडी श्रम, रोजगार एवं विदेश नियोजन विभाग के माध्यम
से प्रदान की जाएगी।
एसओपी के अनुसार, केवल हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत और
वाणिज्यिक रूप से संचालित डीजल, पेट्रोल टैक्सियों के मालिक ही इस योजना के लिए
आवेदन कर सकेंगे। पांच वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
निजी उपयोग, सीएनजी या पहले से इलेक्ट्रिक वाहनों को योजना से बाहर रखा। गया
है। आवेदन प्रक्रिया परिवहन विभाग की ओर से जारी विज्ञापन के माध्यम से शुरू की
जाएगी। आवेदकों को बोनाफाइड प्रमाण पत्र, वाहन का पंजीकरण प्रमाण पत्र, वैध
परमिट, फिटनेस और बीमा प्रमाण पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी आवेदन की जांच, सत्यापन और प्राथमिकता सूची तैयार
करेंगे, जिसे निदेशालय के माध्यम से राज्य स्तरीय सूची के रूप में आगे भेजा
जाएगा।
सब्सिडी स्वीकृति के बाद लाभार्थी को सक्षम प्राधिकारी से
स्वीकृत मॉडल की नई इलेक्ट्रिक टैक्सी खरीदनी होगी और पुराने वाहन का विधिवत
स्क्रैब कराना अनिवार्य होगा। इससे प्रदेश के पर्यावरण में सुधार आने के दावे
किए जा रहे हैं। इस योजना में आने वाली परेशानियों को भी दूर किया जाएगा।
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पंचायतों में प्रशासक नियुक्त
निजी संवाददाता
शिमला
:
अब प्रदेश की 3586 पंचायतों को प्रशासक चलाएंगे। पंचायत प्रतिनिधियों का
पांच साल का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो गया है और सभी पंचायतें भंग हो
गई हैं। अब पंचायत के विकास कार्य से जुड़े सभी फैसले प्रशासक ही लेंगे।
प्रदेश की पंचायतों में करीब 30 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि
थे। इनमें वार्ड सदस्य, प्रधान, उपप्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद
सदस्य हैं। वार्ड सदस्य के अलावा अन्य प्रतिनिधियों के मानदेय पर सरकार हर
महीने लगभग पांच करोड़ रुपए खर्च करती है जबकि वार्ड सदस्य को केवल ग्रामसभा
की मीटिंग में शामिल होने पर ही पैसा मिलता है। पंचायतों के भंग होने के
बाद हर महीने पांच करोड़ की बचत होगी। अब पंचायत में होने वाले विकास कार्य,
योजनाओं की स्वीकृति, भुगतान और प्रशासनिक फैसले प्रशासक लेंगे। प्रदेश की
पंचायतों से पहले 47 शहरी निकायों में सरकार पहले ही प्रशासक लगा चुकी है।
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'समर्थ पंचायत पोर्टल' से जुड़ेगे सभी ग्रामीण
सभी गतिविधियां आनलाइन देखी जा सकेंगी...
निजी
संवाददाता
शिमला : अब हिमाचल
में भी सर्भी ग्रामीण लोगों को ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ से जोड़ दिया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायतों की आय व्यवस्था को पारदर्शी और डिजिटल बनाने
के लिए बड़ा फैसला लिया है। पंचायती राज विभाग की अधिसूचना के अनुसार पहली
अप्रैल 2026 से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ का
उपयोग अनिवार्य कर दिया है।
इस पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कर एवं गैर-कर आय से
जुड़े सभी कार्य किए जाएंगे। इसमें कर निर्धारण, करदाताओं का पंजीकरण, मांग पत्र
तैयार करना, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा और पंचायत संपत्तियों से होने वाली आय का
प्रबंधन शामिल है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अपने स्रोत की आय से संबंधित सभी
गतिविधियां अब केवल समर्थ पंचायत पोर्टल के जरिए ही होंगी।
इन कार्यों की ऑफलाइन प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर
दिया जाएगा। यह पोर्टल पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित किया
गया है, जिसका उद्देश्य पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता, एकरूपता
और दक्षता लाना है। इस संबंध में सभी उपायुक्तों, जिला पंचायत अधिकारियों
औरबीडीओ को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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