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ग्रास साप्ताहिक, निर्मल निवास, सपरून, सोलन
(हि.प्र.)
न.-9418104770 |
सुभाष विरमानी के आने से शांडिल पर नकेल
मंत्री के पुत्र को विधायक बनाने
के सपने का क्या होगा...
निजी संवाददाता
 सोलन :
कांग्रेस आलाकमान ने
सोलन के युवा वकील सुभाष विरमानी को जिला अध्यक्ष नियुक्त कर बढ़ी चाल खेल दी
है। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि सुभाष विरमानी को कांग्रेस
सोलन विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी घोषित कर दे। यदि ऐसा हो गया तो
मौजूदा विधायक और सरकार में मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल के उस सपने का क्या
होगा जो उन्होंने एक समय सार्वजनिक मंच से उद्घोषित भी कर दिया था। जिसका भाव
था कि उनका पुत्र कर्नल संजय शांडिल ही उनका उत्तराधिकारी होगा।
एडवोकेट सुभाष विरमानी पेशेवर वकील हैं और लंबे समय से
कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस की तरफ से विधानसभा
का चुनाव भी लड़ा था। लेकिन अब उनकी पहचान सूझबूझ वाले निष्ठावान कांग्रेसी के
रूप में है। हलांकि बहुत से लोग इस बात को भांप गए हैं कि सुभाष विरमानी भी आने
वाले समय में सोलन से कांग्रेस का चेहरा हो सकते हैं। इसलिए लिए विरोधी गुट ने
उनकी काट करनी भी शुरू कर दी है। उन पर आरोप लगाया जाता है कि वह हिमाचल विकास
कांग्रेस से कांग्रेस में आए हैं। तो प्रतिउत्तर में यह भी कहा जा रहा है कि
कर्नल धनीराम शांडिल भी तो हिमाचल विकास कांग्रेस से कांग्रेस में आए थे।
हलांकि अभी हिमाचल राज्य विधानसभा चुनाव में काफी समय है
और कर्नल धनीराम शांडिल भी अपनी राजनीति के उतार पर है। उनका विरोध भी इस
कार्यकाल में काफी जोरदार ढंग से हुआ है। वह अपने पुत्र संजय शांडिल को सोलन से
विधायक बनते हुए देखना चाहते हैं। एक बार तो उन्होंने खुले मंच से ही एलान कर
दिया था कि अब उनका स्थान उनका पुत्र ही लेगा। शायद उन्हें इस बात के लिए
पार्टी आलाकमान से फटकार भी लगी तभी उन्होंने अपने इस बयान को वापस भी ले लिया
था।
मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस के भीतर बिसात नए तरीके
से बिछाई गई है। प्रदेश का अध्यक्ष रेणुका विधानसभा क्षेत्र के विनय कुमार को
बनाया गया है। वह भी प्रदेश के बड़े दलित नेता हैं। दलित राजनीति में जातीय
संतुलन को बरकरार रखने के लिए सुभाष विरमानी की राजनीति को पंख लगाए गए हैं।
आने वाले दिनों में यदि सुभाष विरमानी को कांग्रेस का टिकट थमा दिया जाए तो
इसमें कोई अचरज नहीं होगा।
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सोलन में कम्प्यूटर फेल कर दिए हेराफेरी मास्टरों ने
उत्तर प्रदेश के ट्रक सोलन में पंजीकृत जो हुए...
निजी
संवाददाता
सोलन :
सोलन में कम्प्यूटर भी फेल कर दिया हेराफेरी
मास्टरों ने। यूं तो हिमाचल में सरकारी दफ्तरों का कार्य कम्प्यूटरों के जरिए
हो रहा है और दावा यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की हेराफेरी की कोई संभावना
नहीं है। लेकिन सोलन में ही प्रदेश सरकार के दावे हांफने लगे हैं। अब उत्तर
प्रदेश से खरीदे गए तीन ट्रक सोलन के फर्जी पते पर पंजीकृत कर दिए गए। कुछ दिन
पहले डीसी सोलन ने एक पटवारी को फर्जीवाड़े के कारण पद से हटा दिया था।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि अधिकारियों ने क्या अपना पूरा
कार्य क्लर्कों के हवाले कर दिया है। यदि ऐसा है तो यह बहुत गंभीर समस्या है।
यह ट्रक पंजीकरण मामला आरएलए की जांच में सामने आया है। एमवीआई ने फिजिकल
वेरिफिकेशन में ट्रकों को नहीं पाया है। जांच में शक क्लर्क पर व्यक्त किया जा
रहा है। मतलब स्पष्ट है कि जो कार्य क्लर्क ने कर दिया वह फाइनल हो जाता है,
उसे कोई अधिकारी क्रास चैक नहीं करता है। हैरानी की बात है इसके लिए बनाई गई
आईडी किसी अन्य जगह से भी लॉगिन हो रही थी और अधिकारियों को पता ही नहीं चला।
इस मामले में अब पुलिस अपने ढंग से जांच कर रही है लेकिन यक्षप्रश्न यह है कि
इस प्रकार के कार्यों के लिए किसी बड़े अधिकारी की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं है।
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खुले में कचरा फंकना जारी
निजी संवाददाता
सोलन : नगर निगम ने
जब से शहर के बड़े डस्टबिन लोहे के कबाड़ में बेचे हैं तब से लोगों ने कचरा
खुले स्थानों पर बाहर फेंकना शुरू किया हुआ है। हलांकि सुबह शाम वहां से
कूड़ा उठा लिया जाता है लेकिन इन स्थानों पर जिस प्रकार की दुर्गंध आती है
उससे लोगों का वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है।
नगर में अक्सर कई स्थानों पर कूड़े के ढेर देखे जा सकते
हैं। इससे यही लगता है कि निगम कूड़ा उठाने के पैसे तो लोगों से ले रही है
लेकिन घरों से ठीक से कचरा एकत्र नहीं किया जा रहा है। ऐसे में लोगों के
पास कचरा खुले में फेंकने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। नगर निगम के पास
ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि जिन लोगों से पैसे लिए जा रहे हैं उनका कचरा
सही से उठाया भी जा रहा है या नहीं, इस बात की जांच अधिकारी कर सकें। उल्टा
निगम ने कचरा उठाने वालों को ही चालान करने की ताकत देकर इतिश्री कर दी है।
भगवान ही मालिक है इस नगर निगम का।
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सोलन नगर में रैपिडो सेवा और ऑटो रिक्शा वालों में ठनी
दोनों का विवाद जिला प्रशासन के समक्ष पहुंचा...
निजी
संवाददाता
सोलन :
पिछले दिनों सोलन में रैपिडो सेवा प्रदान करने
वाले युवाओं और ऑटो चलाने वालों में आपस में ठन गई। रैपिडो आन लाइन सवारियों को
ढोने की सुविधा है और सोलन में भी कुछ युवाओं ने इस सेवा को नगर की जनता को
समर्पित करने का प्रयास किया। इस नई सेवा के शुरू होते ही सोलन के ऑटो रिक्शा
चालकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
रैपिडो सेवा के लिए इसे आन लाइन बुक करना पड़ता है और अपनी
लोकेशन सवारी को भेजनी होती है और किराया भी ऑन लाइन ही तय हो जाता है। कहते
हैं कि इस प्रकार की सेवा प्रदान करने वालों ने ऑटो रिक्शा के निर्धारित
प्वांइटस से ही सवारियां उठानी शुरू कर दी तो आटो रिक्शा वालों ने इसका विरोध
किया कुछ ही समय में आटो रिक्शा ऑपेटर्ज की यूपियन भी इस मामले में कूद गई। बात
इतनी बढ़ गई कि रैपिडो और शूलिनी ऑटो रिक्शा यूनियन वालों ने अपना अपना विरोध
उपायुक्त सोलन और आरटीओ के समक्ष दर्ज करवा दिया। रैपिडो वालों ने कहा कि यह
सेवा देश के और हिस्सों में भी चल रही है और पूरी तरह कानूनी है।
उधर ऑटो रिक्शा यूनियन के प्रधान धर्मपाल ठाकुर ने कहा कि
रैपिडो वाले उन सवारियों को ढो रहे हैं जिन्हें ऑटो रिक्शा वाले ढोते हैं। उनका
आरोप है कि सोलन में सवारियां ढोने की रैपिडो वाले के पास प्रदेश सरकार और जिला
प्रशासन की कोई स्वीकृति नहीं है। जिन राज्यों में यह सेवा चल रही है वहां भी
इनका विरोध हो रहा है। वह कहते हैं कि ऑटो रिक्शा वालों पर प्रदेश सरकार ने कई
प्रकार की बंदिशें लगा रखी हैं। वह कई प्रकार का टैक्स सरकार को अदा करते हैं
और सरकार ने उनकी पहचान भी सुनिश्चित कर रखी है। लेकिन रैपिडो के लिए कोई पहचान
प्रदेश सरकार ने सुनिश्चित नहीं की है। वह बस स्कूटी और वाइक में आते हैं और
सवारियां उठाकर ले जाते हैं।
ऑटो रिक्शा वालों का कहना है कि उन्हें रैपिडो वालों से
कोई परेशानी नहीं है और न ही वह सोलन वासियों को ऑटो रिक्शा जैसी सुविधाजनक और
सुरक्षित सुविधा प्रदान कर सकते हैं। किराए में भी कोई विशेष अंतर नहीं है।
रैपिडो वाले ऑटो रिक्शा वालों की तरह सभी प्रकार की स्वीकृतियां और नियम के तहत
एक पहचान के साथ चलें उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
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नालागढ़ ब्लास्ट में गिरफ्तार
निजी संवाददाता
नालागढ़ : पंजाब
पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ पुलिस थाना ब्लास्ट केस की जांच में एक
बड़ी सफलता हासिल करते हुए पाक-आईएसआई से समर्थन प्राप्त बब्बर खालसा
इंटरनेशनल (बीकेआई) आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े दो गुर्गों को गिरफ्तार किया
है। इस घटना पर पहले से ही इसी प्रकार का अंदेशा जताया जा रहा था।
पंजाब पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई हिमाचल पुलिस और
केंद्रीय एजेंसियों के साथ निकट समन्वय से की गई है। गिरफ्तार आरोपियों की
पहचान शमशेर सिंह उर्फ शेरू उर्फ कमल और प्रदीप सिंह उर्फ दीपू के रूप में
हुई है, जो एसबीएस के अंतर्गत आने वाले कस्बा राहों के निवासी हैं। पुलिस
टीमों ने उनके कब्जे से एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) भी
बरामद किया है। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि गिरफ्तार किए गए आरोपी गुरप्रीत
उर्फ गोपी नवांशहरिया और बीकेआई के मास्टरमाइंड हरविंदर रिदा के निकटतम
साथी शुशांत चोपड़ा के निर्देशों पर काम कर रहे थे।
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