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हिमाचल की दवा कंपनियों को बंद किया जाए

47 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए...

निजी संवाददाता

     शिमला : हिमाचल प्रदेश में बनने वाली दवा कंपनियों को बंद कर दिया जाए तो ही अच्छा है। जब भी यहां बनी दवाओं की गुणवत्ता की जांच होती है तो बार बार इनके सैंपल फेल हो जाते हैं। प्रदेश सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। एक बार फिर केंद्रीय औषधाि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और विभिन्न राज्य दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं की जांच में देशभर की 141 दवाएं व अन्य हेल्थकेयर उत्पाद गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 47 दवाएं भी शामिल हैं, जो देश में सबसे अधािक हैं।
     इन दवाओं का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, ऊना, परवाणू, काला अंब, कांगड़ा और पांवटा साहिब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फार्मा इकाइयों में हुआ था। यह खुलासा मार्च 2026 में जारी ड्रग अलर्ट में हुआ है जिसने प्रदेश के फार्मा हब होने के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
     राज्य दवा नियंत्रक का वही प्रेस नोट नई तारीख के साथ बाहर आ गया है, जिसके कोई मायने नहीं हैं। हिमाचल में निर्मित फेल हुई दवाइयों में अमोक्सिसिलिन व पोटेशियम क्लेवुलानेट, डाइक्लोफेनाक, पैरासिटामोल व क्लोरजोक्साजोन, पोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन, पैरासिटामोल, प्रो क्लोरपेराजीन क्लारपराज पेराजीन माउथ डिसॉल्विंग, एलोप्यूरिनोल, स्टेराइल वॉटर फॉर इंजेक्शन, कोडीन युक्त कफसिरप, सेफिक्सिम, मेट्रोनिडाजोल, रेबेप्राजोल सोडियम, रेबेप्राजोल गैस्ट्रो रेजिस्टेंट टेबलेट, प्रेगाबालिन व मिथाइलकोबालामिन कैप्सूल, एसेक्लोफेनाक व पैरासिटामोल, लिवोसिट्राजिन, डेन्सेट्रॉन, पोविडोन आयोडीन व ऑर्निडाजोल ओयंटमेंट, अमोक्सिसिलिन क्लेवुलानेट सस्पेंशन, कैल्सिड, पिरासिटाम सिरप, एल्बेंडाजोल, आयरन फोलिक एसिड व जिंक कैप्सूल तथा ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ओआरएस) प्रमुख रूप से शामिल हैं। बार बार जहर परोसने के बाद क्या इन कंपनियों को बंद नहीं हो जाना चाहिए।

 
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