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कोकरोच, चाय के प्‍याले में तूफान

जितना हल्‍ला था उतने लोग नहीं जुटे जंतर मंतर पर

विशेष संवाददाता

     शिमला : कोकरोचों का प्रदर्शन चाय के प्याले में तूफान साबित हुआ। जिस हिसाब से इस बात का प्रचार किया गया कि देश के युवा कोकरोच जनता पार्टी के बैनर तले करोड़ों के संख्या में एकत्र हो चुके हैं ऐसा दिल्ली के जंतर मंतर में हुए प्रदर्शन में नहीं दिखा।
     कोकरोचों के दिल्ली प्रदर्शन से बड़ा प्रदर्शन तो हरियाणा के कुरुक्षेत्र और पानीपत के युवाओं ने कर डाला। बोस्टन अमेरिका में बैठे एक युवा अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद कोकरोच जनता पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया और कुछ ही दिन में उन्हें सोशल मीडिया में करोड़ो फोलोअस मिल गए। बस इस बात को बबंडर देश-दुनियां में चलता रहा। 6 जून को दीपके भारत आए और जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन किया।
     इस प्रदर्शन में जितना हो हल्ला मचा उसके अनुपात में कुछ भी लोग जंतर मंतर में नहीं थे। फिलहाल सात दिन का अल्टेमेटम देकर इस मामले को शांत कर दिया गया। कोकरोच जनता पार्टी ने नीट सहित अन्य पेपर लीक होने पर भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। लेकिन यह प्रदर्शन चाय के प्याले में तूफान के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं था।
     अब तरह तरह की बातें कोकरोचों के संगठन और आंदोलन को लेकर की जा रही हैं। इस आंदोलन का दिल्ली में भले ही कोई असर न पड़ा हो लेकिन देश भर के करीब 12 राज्यों और 50 से अधािक स्थानों पर युवाओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर दिल्ली प्रदर्शन जैसा भी रहा हो लेकिन कोकरोचों ने यह बात पूरे विश्व को बता दी है कि देश का युवा मौजूदा मोदी सरकार से खुश नहीं है। अब इस सारे घटनाक्रम का असर यह हुआ है कि मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं की नाराजगी का जो खुलासा हुआ है उसका लाभ आने वाले समय में किसको मिलेगा।
     यह बात भी किसी से छुपी हुई नहीं रह गई है कि कोकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर जो युवाओं की नाराजगी सामने आई है उसका लाभ मोदी विरोधाियों को ही मिलेगा। देखना यह है कि इसका बड़ा हिस्सा कांग्रेस के पक्ष में जाता है या इंडिया गठबंधान के अन्य घटक दलों के पक्ष में राज्यवार जाता है। इंडिया के 23 घटक दलों ने भी 8 जून को दिल्ली में बैठक की है। कुछ लोग कोकरोचों को आरएसएस का प्रायोजित कार्यक्रम बता रहे हैं। यदि यह सच है तो इसका लाभ आरएसएस के उस धड़े को मिल सकता है जो मोदी को सत्ता से बाहर देखना चाहते हैं।
     जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद यह बात भी साबित हो चुकी है कि कोकरोच लीडरलेस हैं और 6 जून का प्रदर्शन एक ऐसा अवसर था जिससे कोकरोच जनता पार्टी एक रात में ही भारत की राजनैतिक तस्वीर बदल सकते थे। भविष्य में कोकरोच किस तरह आगे बढ़ते हैं इस पर भी लोगों की नजर टिकी हुई है।

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